जीवन
उस आईने के समक्ष बैठ कर
मैं बार-बार अपनी
सफ़ेद बालों में ,
हड्डी और चमड़े वाले हाथों से
फेरता रहा ,सहलाता रहा
अपने झुर्रियों को
जो चेहरे पर
अब साफ नज़र आ रहे ।
साफ नजर आ रहा था
उस आईने के सामने
पड़ा मेरा अस्तित्व
और आईने के पीछे की सारी जिंदगी
निरंतर मैं आईने में जीवन की
निस्सारता को निहारता रहा ।
आईने पर पड़ रही
खिड़की वाली रौशनी
भौचक्का करती मेरी आँखें .......
👌✍️
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